दिया – Festival Poems Diwali 2020

POEMS ON FESTIVALS

दिया – Festival Poems Diwali 2020


दिया


एक दिया जो जला रौशनी के लिए,
उसको सबने जलाया खुशी के लिए,
आग दिल मे लगी जल रहा था बदन,
वो तड़पता रहा जिंदगी के लिए।
 
रूह जलती रही ,वो चमकता रहा,
आंख गलती रही, फिर भी हसता रहा,
चीर कर चीर रातों की होकर मगन,
वो सुलगता रहा आदमी के लिये।
 
साथ सब हैं मगर ,जल रहा बस दिया,
ज्योति जब तक रही, प्यार सबने दिया,
ए हवा तुम चलो बन के मेरा सनम,
हो सफल ये जनम बन्दगी के लिये।
 
है तमन्ना यही अब जलूँ रात दिन,
तेरी रातें कभी भी ना हो मेरे बिन,
एक पल में जियूँ उम्र भर की तपन,
यूँ ही जलता रहूँ मैं सभी के लिए।
 
✍सुजीत पाण्डेय

Diwali 2020


Festival Poems Diwali 2020