सर पे सिंदूर का “फैशन”नही है hasya kavita lyrics

Humorous poems

सर पे सिंदूर का “फैशन”नही है,
गले मे मंगलसूत्र का “टेंशन”नही है!
माथे पे बिंदी लगने मे शर्म लगती है,
तरह तरह की लिपस्टिक
अब होंठो पे सजती है!

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फेसबुक सा फेस है तेरा, गूगल सी हैं आँखें- hasya kavita on internet

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फेसबुक सा फेस है तेरा, गूगल सी हैं आँखें
एंटर करके सर्च करूँ तो बस मुझको ही ताकें
रेडिफ जैसे लाल गाल तेरे हॉटमेल से होंठ
बलखा के चलती है जब तू लगे जिगर पे चोट

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“अर्ज़ किया है”। तक़दीर में जो है वही मिलेगा,- hasya kavita Daku ki Loot

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” अर्ज़ किया है”।
तक़दीर में जो है वही मिलेगा,
हैंड्स-अप कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा…

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मैंने जीना सीख लिया है- hasya kavita on politician

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मैंने जीना सीख लिया है

भरी सभा मे भ्रष्टाचार उन्मूलन पर भाषण भी दिया है
फिर आसपास के भ्रष्ट आचरण मे खुद को संलिप्त किया है

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कोई टोपी तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है,- hasya kavita Kavi

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कोई टोपी तो कोई अपनी पगड़ी बेच
देता है,
मिले गर भाव अच्छा जज भी कुर्सी बेच
देता है,
तवायफ फिर भी अच्छी है के वो सीमित है
कोठे तक,
पुलिस वाला तो चौराहे पे वर्दी बेच
देता है,

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