सब्जी में पड़ता जैसे मसाला । – hasya kavita hindi

Humorous poems

Synopsis


सब्जी में पड़ता जैसे मसाला । – hasya kavita hindi

सब्जी में पड़ता जैसे मसाला ।


सब्जी में पड़ता जैसे मसाला ।
मेरे पीछे पडा़ ये अपना  साला ।

जहाँ भी जाऊँ पहुँचे साला ।
 बार बार मुँह से निकले साला ।
हर गाली के पीछे लग जाता साला ।
आगे साला पीछे साला चारों ओर घेरा साला

पीस पीस बना दिया मुझे मसाला ।
कितना निकम्भा है ये साला ।
दाल में जहाँ कुछ दिखता काला ।
दीवार में अगर बना हो आला ।
खेत में लगा हो जब कोई जाला ।
घऱ में आया हो अपना साला ।
समझो खतरा है ये पाला ।

साला, ये साला है खतरे वाला ।
इस दुनियाँ में जब में पैदा हुआ था ।
एक छोटा सा नन्हाँ बच्चा था ।
11 जनवरी यही महीना था ।
कपकपाती ठन्ड पड़ी थी ।
बाहर देखा वर्फ गिरी थी
ठन्ड में मैं कपकपाया ।
माँ ने उड़ाया तब दुशाला ।
तभी से सीने में लगाया है ये साला ।

साला कितना प्यारा है साला ।
प्यार से बोलो जय साले की सारे बोलो जय साले की ।
सब मिलकर बोलें जय साले की ।

थोडा़ सा बड़ा हुआ जब ।
खेलने कुदने था लगा जब ।
भेज दिया गया मुझे पाठशाला ।
ये साला चला संग सदा मेरे साला ।

जिन्दगी जब जवानी में आयी ।
एक नये मोड़ पर मुझे ले आयी ।
जुड़ गया बीवी से नाता ।
उसका घर मेरा ससुराल कहलाता ।

ससुराल में साले ही साला ।
बीवी के भाई साला साला ।
बड़ी मस्त जिन्दगी ये साला ।
सालों ने घेरा मैं मसाला ।
कितना कमीना है ये साला ।
गमों में खो गया तभी मसाला ।
जा पहुँचा पीने मधु प्याला ।
तभी से भा गयी मधुशाला ।
कितनी मस्त है ये शाला ।
सालों में बीती जिन्दगी साला ।
साला साला हो गया बेकार साला ।
 
– रेबा धर पंत

Hasya Kavita hindi


Hasya Kavita Hindi